जय माँ.....
आज की पोस्ट को पढ़ कर आप चकित रह जायेगे की अभी तंत्र इतना गोपनीय है की ऐसा भी होता है।
आज हम तंत्र के गोपनीय विषय रस तंत्र के बारे में बात कर रहे है। आज दुनिया रस तंत्र को सिर्फ पारद विग्रह के कारन ही जानती है या फिर सबको लगता है की रस तंत्र सिर्फ पारद विग्रह तक ही सीमित है। परंतु ऐसा नही है, ये वहीँ रस तंत्र है जिससे पारद से स्वर्ण बनाया जाता था। इसके साथ एक गोपनीय बात ये भी है की रस तंत्र में अनेको दिव्य अर्को का निर्माण भी किया जाता है।
वैसे तो रस तंत्र के पूर्ण साधक अब कुछ ही बचे है फिर भी आजकल मार्केट मे पारद विग्रह सब्जी के भाव बिक रहे है। माँ जाने की इनके पास ऐसी कौन सी दिव्य शक्ति है जिससे ये 2 दिनों में अनेको पारद विग्रहो का निर्माण कर लेते है। नही तो मुझ जैसे मुर्ख को तो 15 दिन लग जाते है एक विग्रह के निर्माण में।
खेर, ऐसे सर्वशक्तिशाली महानुभवों के लिए मैं मूढमति कुछ नही कह सकता। वो अपना कार्य कर रहे है और मैँ अपना।
आज मैँ आपको एक दिव्य अर्क के बारे में बताने आया हु। ये अर्क कितना महत्वपूर्ण होगा इसका अनुमान आप इसी बात से लगा सकते है की मैँ स्वयं इसका सेवन करता हु। कुछ साधको की संकीर्ण मानसिकता,कुछ उन महा शक्तिशाली लोगो की करनी और कुछ तंत्र की गोपनीयता ने ऐसा किया की ये अर्क सदा से गुप्त ही रह गया। एक साधक को पारद विग्रह के निर्माण में जितना श्रम करना पड़ता है उससे कहि अधिक श्रम साध्य है इन अर्को का निर्माण। इसलिए आज तक किसी ने इसे उजागर नही किया।
पर मैं तो अपनी उस ज़िद और आदत से लाचार हु की सिमित परिधि में तंत्र के गोपनीय विषयो को सामने लाऊगा।
उसी दिशा में आज बात करते है काम्या अर्क पर।
क्या है काम्या अर्क:
पारद के अष्ठ संस्कार एवम् दिव्य ओसद्यो के मिश्रण से बनता है ये अर्क। इसके निर्माण के समय एक साधक पारद के अष्ठ संस्कार करते है और दूसरे भगवती त्रिपुर सुंदरी के मंत्रो के अनवरत जाप करते है।
इसके बाद एक गोपनीय विधि से इस अर्क को शक्तिकृत किया जाता है और फिर भगवती को अर्पित किया जाता है। अब हमे प्राप्त होता है यह काम्या अर्क।
यह अर्क परम सौभाग्य को देने वाला है।
काम्या अर्क और उसके लाभः
वेसे तो इसके लाभ अकथनीय और अवर्णीय है फिर भी आप लोगो की जानकारी के लिए कुछ लाभ यहाँ बता रहा हु।
1. इस अर्क का सेवन करने से सप्त चक्र संतुलित रहते है और जब चक्र संतुलन में रहे तो कोई रोग नही होता।
2. अर्क का सेवन करने वाले से नकरत्मक्ता सदैव दूर रहती है।
3. संध्या के समय एक पात्र में थोडा जल लेकर अर्क की 7 बुँदे डाल कर इस जल के छीटें घर में देने से घर का वास्तु दोष समाप्त होता है, घर पर किसी का पर प्रयोग असर नही करता एवम् घर सदा सुरक्षित रहता है।
4. अर्क का सेवन करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नही बढ़ती , ह्रदय मजबूत रहता है और heart attack का खतरा नही रहता।
5. नहाने के पानी में इस अर्क की 4 बुँदे डाल कर नहाने से पुरे दिन की तंत्र सुरक्षा प्राप्त होती है।
6. किसी रोगी व्यक्ति के सर से थोड़े बाल लेकर किसी मिट्टी के पात्र में रख लेवे और उस पर एक चमच्च अर्क डाल देवे और इस पात्र के समक्ष प्रतिदिन एक माला महा मृत्युंजय मंत्र की करे तो आप पायेगे की कुछ ही दिनों में रोगी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है
7. इसी तरह से एक काँच की छोटी बोतल में साध्य के सिर के बाल लेकर उसमे 11 बुँदे अर्क की डाल दे और इस बोतल का मुँह ठीक से बन्द कर के इसके सामने हनुमान जञ्जीरा मन्त्र की 1 माला जाप करे ( यह मन्त्र पूर्व में ही दिया जा चूका है ) और इस बोतल को किसी भी हनुमान मंदिर में गाड़ देवे तो जब तक ये बोतल गड़ी है साध्य व्यक्ति जिसके बाल इसमे है उस पर कोई तंत्र प्रयोग असर नही कर सकता।
8. जिन लोगो को पुरानी सर्दी खाँसी, दमा, जुखाम आदि हो वे इस अर्क का सेवन करके अपने रोगों से मुक्ति पा सकते है।
9. आज्ञा चक्र पर प्रतिदिन अर्क की मालिश करने से कुछ दिनों में आज्ञा चक्र जाग्रत होता है जिससे साधना में एकाग्रता आती है और स्मरण शक्ति का विकास होता है।
10. यदि नियमित अर्क का सेवन किया जाये तो लगभग 150 से अधिक रोगों से बचाव होता है।
11. अर्क की एक बून्द जल में डाल कर अपने इष्ठ को इस जल से स्नान करवाने पर उनकी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
ये तो मात्र कुछ अंश है इस अर्क के बारे में। जब आप इसकी मात्र एक बून्द का सेवन करेगे तो आप साक्षात् भगवती की अनुकम्पा का अनुभव करेगे। यहाँ तक की इसकी सुगंध मात्र ही आपको परम अनुभूति करवा देगी।
मकर सक्रांति के पावन अवसर पर गुरूमाई और माँ आद्या जी के आशिर्वाद स्वरूप प्रथम बार इस अर्क का निर्माण जन साधारण हेतु किया जा रहा है।
इछुक जन 11 जनवरी तक अनुरोध कर सकते है।
शेष बाते फिर कभी
अभी के लिए आज्ञा
भगवती प्रणाम......!